छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा में पितर पाख
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छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा में पितर पाख का विशेष महत्व है। पितर बईसकी, चौक,
तर्पण, कौवे को भोजन, महतारी नवमी, पारंपरिक पकवान और पितर खेदा जैसी परंपराओं
के माध्...
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4 comments:
Badhai.
स्व.तनसिंह जी की लेखनी को शब्द देने के लिए संज्ञा टंडन जी का हार्दिक आभार
..बैरागी चित्तोड़ एक कालजयी रचना है ...ह्यदय कि तीक्षणता को लेखनी के रूप में उतार दिया पूज्य तन सिंह जी ने ....चित्तोड़ के पत्थर पुनः जीवित हो उठे ....आपके इस प्रयास के लिए आपका आभार .
बहुत खुबसूरत लेखनी को मिले अनुठे स्वर
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